मम्मी - मेरी टीचर और मेरी सहेलि

दस बरस की पम्मी की मम्मी ने अभी कुछ माह पूर्व ही फर्म में नौकरी करनी शुरू की । यही सोचकर कि अब बिटिया बड़ी हो गई है, उसे अब मेरी इतनी जरूरत नहीं । लेकिन घर में हर समय मम्मी की उपस्थिति की अभ्यस्त पम्मी को मम्मी का नौकरी करना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। उसका कहना है कि स्कूल से लौटन पर मम्मी बिना घर बहूत बुरा लगता है ।

मम्मी को घर आने में बहुत देर हो जाती हैं। मम्मी के न रहने के नौ भी बज जाते हैं । पापा घर में मेरे साथ रहते है। लेकिन मम्मी के न रहने से बहुत गुस्सा आता है । पापा से भी बात करने का मन करता है । कार्यालय से थककर लौटी मम्मी को घर आकर मुझे प्यार करने से भी चिढ़ होती है । अकसर मम्मी को उस दिन भी कार्यालय जाना होता है, जब मेंरी छुट्टि होती है। मम्मी के बिना पूरा दिन बहुत उदास लगता है।

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पहले मम्मी के पास मेरी बातों को सुनने के लिए खूब समय होता था वे मेरी बातों को सुनने के लिए खूब समय देती थीं । मेरी टीचर और मेरी सहेलियों के बारे में पूछती थीं, लकिन अब उनके पास मेरी बात सुनने का समय नहीं है। मम्मी के नौकरी करने से हमारा घर बहुत अस्त-व्यस्त हो हया है। समय पर से कोई चीज ही नहीं मिलती ।

अब मम्मी मेरी पढ़ाई की ओर भी ध्यान नहीं देतीं, इसी से कक्षा में मेंरा ग्रेड गिरता जा रहा है । जब पम्मी से पूछा गया कि क्य वह अपनी मम्मी को नौकरी करने से रोकना चाहती है तो उसका जोरदार शब्दों में जवाब हां में था । सर्वेक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि बच्चों को जहाँ इस बात का गर्व है कि उनकी मां नौकरी करती है, वहीं मां की घर में अनुपस्थिति उन्हें खलती है।