हिमाचल प्रदेश गंतव्य

कल्पना कीजिए आप किसी खूबसूरत घाटी में घुमने निकले हैं। चारों तरफ प्रकृति अपने पूरे शबाब पर है। हवा के मंद-मंद झोंके माहौल को खुशगवार बना रहे हैं। दूर कहीं घटी के सीने पर कोई जल धारा फिसल रही है और प्रकृति का कोई जादुई राग हवा में बज रहा है। सहसा माहौल में सरगोशी होती है।

लोक वादयों की सुमधुर धुनों के बीच नाचती-गाती युवक युवतियों की कोई टोली उधरआ निकलती हैं। ये टोली घाटी की तलहटी में पहुँच रक गोल दायरा बना लेती है और फिर पर्वत-घाटियां भी उनके लोकनृत्य की थिरक में शामिल हो जाती हैं ।

हिमाचल प्रदेश ऐक ऐसा पर्वतीय राज्य है जहाँ की पर्वत-घाटियां, खेत-खलिहान, घर-आंगन ऐसे दृशयों के गवाह हैं और आकर आपनी इस कल्पना को साकार होते देख सकते हैं। चाहे कोई धार्मिक आयोजन हो, त्योहार या कोई खुशी का अवसर हो, हिमाचल के लोग नाच-गाकर अपनी भावनाऔं को अभिव्यक्त करते हैं।



हिमाचल की जितनी घाटियां हैं और जितनी बोलियां हैं, उतने ही यहाँ के लोकगीत हैं और उतने ही लोकनृत्य। जिस तहर यहाँ के लोगों का विशिष्ट पहनावा है उसी तरह यहाँ के लोकनृत्य भी विशिष्टता लिए हैं और इलनें पहाड़ी जन जीवन की थिरकन समायी है।

हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर लोकनृत्य ऐसे हैं जिनमें पुरुष व महिलाएं एक साथ नत्यरत होते हैं कहीं कोई संकोच नहीं, कहीं मन में कोई दुराग्रह नहीं। सहज स्वाभाविक ढंग से वे एक दूसरे का साथ निभाते हैं और फर माहौल मों मसती भर देते हैं। दर्शक भी उनकी स्वर-लहरियों के साथ झूमे बिना नहीं रह पाते।