कामसूत्र महर्षि वात्स्यायन द्वारा लिखा गया प्राचीन भारतीय काम कला

कामसूत्र में आचार्य वात्‍स्‍यायन ने 'काम' को एक कला कहा है। स्‍त्री पुरुष इस कला को जितना अपने दांपत्‍य जीवन में उतारते हैं, उनका दांपत्‍य जीवन उतना ही मधुर होता चला जाता है। आधीआबादी आचार्य वात्‍स्‍यायन के कामसूत्र को आधुनिक शब्‍दावली के साथ पाठकों के समक्ष लेकर आया है। इसके लिए आधीआबादी डॉट कॉम की टीम ने सेक्‍स एक्‍सपर्ट, यूरोलॉजिस्‍ट, स्‍त्री रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक एवं सेक्‍स के क्षेत्र में अनुभव को आधार बनाकर काम करने वाले कई विशेषज्ञों से लगातार बातचीत की और उनके अनुभव के निचोड़ को पाठकों के समक्ष रखा है।

इसका मकसद न केवल दांपत्‍य जीवन की एकरसता या उसके ऊब में फंसे पति पत्‍नी को इससे बाहर निकालना है, बल्कि उन्‍हें आनंददायक संभोग के अनुभव से खुद के काम ऊर्जा की अनुभूति भी कराना है। कामसूत्र महर्षि वात्स्यायन द्वारा लिखा गया भारत का एक प्राचीन कामशास्त्र ग्रंथ है। कामसूत्र को उसके विभिन्न आसनों के लिए ही जाना जाता है।

महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की प्रथम यौन संहिता है, जिसमें यौन प्रेम के मनोशारीरिक सिद्धान्तों तथा प्रयोग की विस्तृत व्याख्या एवं विवेचना की गई है। अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान कौटिल्य के अर्थशास्त्र का है, काम के क्षेत्र में वही स्थान कामसूत्र का है। अधिकृत प्रमाण के अभाव में महर्षि का काल निर्धारण नहीं हो पाया है।



परन्तु अनेक विद्वानों तथा शोधकर्ताओं के अनुसार महर्षि ने अपने विश्वविख्यात ग्रन्थ कामसूत्र की रचना ईसा की तृतीय शताब्दी के मध्य में की होगी। तदनुसार विगत सत्रह शताब्दियों से कामसूत्र का वर्चस्व समस्त संसार में छाया रहा है और आज भी कायम है। संसार की हर भाषा में इस ग्रन्थ का अनुवाद हो चुका है।

इसके अनेक भाष्य एवं संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं। वैसे इस ग्रन्थ के जयमंगला भाष्य को ही प्रामाणिक माना गया है। कोई दो सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध भाषाविद सर रिचर्ड एफ़ बर्टन ने जब ब्रिटेन में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद करवाया तो चारों ओर तहलका मच गया और इसकी एक-एक प्रति 100 से 150 पौंड तक में बिकी। अरब के विख्यात कामशास्त्र ‘सुगन्धित बाग’ पर भी इस ग्रन्थ की अमिट छाप है।

महर्षि के कामसूत्र ने न केवल दाम्पत्य जीवन का शृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है। राजस्थान की दुर्लभ यौन चित्रकारी तथा खजुराहो, कोणार्क आदि की जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से अनुप्राणित है। रीतिकालीन कवियों ने कामसूत्र की मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की हैं तो गीत गोविन्द के गायक जयदेव ने अपनी लघु पुस्तिका ‘रतिमंजरी’ में कामसूत्र का सार संक्षेप प्रस्तुत कर अपने काव्य कौशल का अद्भुत परिचय दिया है